लिपि का उद्विकास (Evolution of Script)। उद्विकास में सभ्यताओं का योगदान।

Zyan Ki Bate
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आज के इस लेख में हम लिपि का उद्विकास, लिपि के उद्विकास का कालक्रम तथा इसके उद्विकास में विभिन्न सभ्यताओं का क्या योगदान रहा? इसके बारें में जानेंगे।

तो आइये जानते है.......

लिपि (Script)।  

लिपि केवल अकेले नही हो सकती है यह भाषा से भी सम्बन्ध रखती है, इसलिए लिपि को समझने के लिए दो तथ्यों की जरुरत पड़ेगी। 

  1. भाषा 
  2. लिपि 

भाषा बोलकर किया जाने वाला संचार का माध्यम है। जब विचारों को मौखिक संकेतों के माध्यम से प्रकट किया जाता है तो वह भाषा बन जाता है। इसलिए भाषा की परिभाषा को लेकर विद्वानों में काफी मतभेद है। बोलकर या इशारे से तो प्राणी भी संचार करते है। मनुष्य और जानवरों की भाषा में बड़ा भेद है। वह भेद यह है कि प्राणी अपनी भावना को प्रकट करने के लिए अपनी भाषा का प्रयोग करते है। मनुष्य ही एक ऐसा प्राणी है जो झूठ बोलने के लिए भी अपने भावो को प्रकट करता है और अपनी भावनाओ को छुपाने के लिए भी भाषा का प्रयोग करता है। ऐसा अन्य कोई भी प्राणी नही करता है।

लिपि के उद्विकास का कालक्रमिक वर्णन और सभ्यताओं का योगदान (Chronological description of the evolution of script and contribution of civilizations)।

ऐसा माना जाता है कि आज से लगभग 18 लाख साल पहले भाषा का उद्विकास हुआ और यह धीरे-धीरे जटिल होती चली गयी। हम है Homo Sapiens, इसमें Homo जीनस है। ऐसा माना जाता है कि लिखने की कला का आविष्कार ईसा से 3500 साल पहले सुमेर संस्कृति के लोगो ने किया। सुमेर संस्कृति, मोसोपोटैमिया (ईराक) की एक Component संस्कृति थी। लेकिन इनकी लिपि में Alphabet नही था, जो कि हमारी संस्कृति में है। इनकी संस्कृति में Cuneiform था, जिसे हिंदी में कीलाकार कहा जाता है। कीलाकार संस्कृति में लिपि के रूप में Picture और Symblos का उपयोग किया जाता था।

इसी के 400-500 साल बाद मिस्र में 3200 ईसा पूर्व में Hierogliphic लिपि का आविष्कार हुआ। इनकी लिपि में चिन्ह और चित्र के साथ कुछ वर्ण भी थे।

Levant/Syria/Sinai Peninsula - Semite Tribes

आज जहा सीरिया है, वहा से लेकर सीनाई प्रायद्वीप तक में फैली Semite Tribes ने 2000 ईसा पूर्व के आसपास Alphabet का आविष्कार किया जिसे वर्णमाला कहा जाता है।

मतलब 2000 ईशा पूर्व के आसपास लिपि आ गयी। इस प्रकार से अल्फाबेट के माध्यम से भाषा लिखने में सरलता आ गयी। पहले क्या होता था कि भाव प्रकट करने के लिए चित्रों या इशारो का प्रयोग करना पड़ता था। इस स्थिति में मानव परिपूर्ण रूप से अपने भावो को प्रकट नही कर पता था। लेकिन लिपि आ जाने से मानव को अपने भाव प्रकट करने में आसानी हो गयी। जैसे मान लीजिये की ये प्रकट करना हो कि मै परेशान हूँ, तो पहले चित्र बनाकर बताना पड़ता था की मै परेशान हूँ और साथ में ये नही बता पाते थे कि क्यों परेशान हूँ और जब लिपि के माध्यम से बताना हुआ, तो लिख के बता दिया कि मै परेशान हूँ, साथ में ही कारण भी बता दिया कि क्यों परेशान हूँ। इस प्रकार से भाव प्रकट करने में आसानी आ गयी।

लिपि के अविष्कार से इतिहास नही शुरू होता। लिपि के आविष्कार से इतिहास का काल शुरू होता है। इतिहास तो बहुत पहले से ही शुरू था, जिस काल के इतिहास में लिपि नही थी वो Pre-history कहलाया और जब से लिपि आई वो इतिहास है। क्यों कि इतिहास की परिभाषा ही होती है कि लिखित दस्तावेजो में उपलब्ध विवरणों के आधार पर भूतकाल का अध्ययन ही इतिहास है।

लिपि का आविष्कार तो हो गया था, लेकिन एक समस्या यह थी कि क्या लिपि के माध्यम बस से ही इतिहास का कालक्रमिक वर्णन किया जा सकता है। इतिहास का वर्णन करने के लिए लिपि के साथ-साथ समय का ज्ञान होना चाहिए। यदि समय का ज्ञान न होगा तो हम कैसे बता पायेंगे की ये घटना कब हुई। इस घटना से इतने साल पहले ये घटना हुई। इस घटना के इतने साल बाद ये घटना हुई। इसके लिए हमें दिन, सप्ताह, महीना और वर्ष का भी ज्ञान होना चाहिए ना।

क्या इन सभी के ज्ञान मात्र से इतिहास लिखा जा सकता है? कोई विद्वान यहाँ की घटना का वर्णन कर रहा है और कोई विद्वान दूसरी जगह की घटना का वर्णन कर रहा है। इन सभी घटनाओ में एकरूपता लाने के लिए मतलब सम्बन्ध स्थापित करने के लिए जिससे सभी घटनाओ को एक नियत क्रम में व्यवस्थित किया जा सके, इसके लिए कैलेण्डर चाहिए था जो कि इन सभी कालो को विश्व के कालक्रम से जोड़ सके। इसके आगे मतलब कैलेण्डर प्रणाली का उद्विकास पढ़ने के लिए नीचे दी गयी लिंक पर क्लिक करे। 

इसके आगे का: कैलेण्डर प्रणाली के उद्विकास का कालक्रमिक वर्णन। Evolution of the Calendar System।

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