अटल बिहारी वाजपेयी जी के महान व्यक्तित्व के कुछ रोचक किस्से।

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आज के इस लेख में हम, हम सब के आदर्श, भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के महान व्यक्तित्व के कुछ रोचक किस्सों के बारे में जानेंगे।

तो आइये जानते है.......

कांग्रेस की सरकार होते हुए भी 1994 में चुना गया भारत का सर्वश्रेष्ठ सांसद।
कांग्रेस की सरकार होते हुए भी 1994 में चुना गया भारत का सर्वश्रेष्ठ सांसद।

स्वर्गीय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को 1994 में भारत का सर्वश्रेष्ठ सांसद तब चुना गया था, जब देश में स्वर्गीय नरसिंघराव जी के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार थी और अटल बिहारी वाजपेयी नेता प्रतिपक्ष थे। अब आप खुद समझ सकते है कि इससे बड़ा अटल बिहारी वाजपेयी की सर्वमान्यता का क्या उदाहरण हो सकता है कि सरकार विपक्ष की फिर भी उनको सर्वश्रेष्ठ सांसद चुना गया ।

विपक्ष में होते हुए भी संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार आयोग में नेतृत्व के लिए भेजे गए।

इसी वर्ष सन 1994 में स्वर्गीय नरसिंघराव प्रधानमंत्री रहते हुए स्वीट्जरलैंड की राजधानी जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार आयोग में पाकिस्तान द्वारा लगाए गए मानवाधिकार हनन के झूठे आरोपों का जवाब देने के लिए अटल जी के नेतृत्व में ही एक दल भेजा था। इससे सिद्ध होता है कि बेशक अटल बिहारी वाजपेयी भाजपा के कार्यकर्ता थे, लेकिन नेता संपूर्ण राष्ट्र के थे।

नरसिंघराव जी चाहते तो अपनी ही पार्टी के किसी नेता का नाम हर पार्टी की तरह आगे करते, लेकिन उनको अटल जी क्वे व्यक्तित्व के बारे में पता था कि जो बात अटल जी में है वो किसी और में नहीं। अटल जी धाराप्रवाह वक्ता थे। उनका व्यक्तित्व सर्वमान्य नेता के रूप में था, इसी वजह से भले ही सत्ता में कांग्रेस पार्टी थी, लेकिन उनके प्रति कोई भेदभाव नहीं था।

1977 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 32वें अधिवेशन में अटल जी का हिंदी में दिया गया भाषण।
1977 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 32वें अधिवेशन में अटल जी का हिंदी में दिया गया भाषण।

अटल बिहारी वाजपेयी जी सदैव एक बात कहा करते थे- "सत्ता सुख भोगने का साधन नहीं, राष्ट्र निर्माण का दायित्व है। 1977 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 32वें अधिवेशन में अटल जी का हिंदी में दिया गया भाषण सदैव हम सभी के लिए राष्ट्र और राष्ट्रभाषा गौरव के मंत्र के रूप में याद रहेगा। अटल जी जैसे महान व्यक्तित्व सदियों में कभी पैदा होते है। कवि ह्रदय, धाराप्रवाह वक्ता, विचारवान लेखक, धारदार लेखक, भावुक जननायक, संगठन के शिल्पी एवं नेतृत्व क्षमता से परिपूर्ण अटल जी सम्पूर्ण व्यक्तित्व थे।

भारतीय राजनीति में शुचिता और सुशासन की पुनर्स्थापना का श्रेय।

मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले में जन्मे अटल जी को भारतीय राजनीति में शुचिता और सुशासन की पुनर्स्थापना का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने अपना सम्पूर्ण राजनीतिक जीवन एक तपस्वी की भांति जिया। वे सही मायने में कर्मयोगी थे। उनकी राजनीति में उदारता स्पष्ट रूप से झलकती थी, इसीलिए वे सर्वमान्य नेता के रूप में हमेशा स्मरण किये जाते रहेंगे। अटल जी ने अपने सामाजिक-राजनैतिक जीवन में अनेक अवसरों पर राजनीतिक शुचिता के उदाहरण प्रस्तुत किये जो अनुकरणीय है।

अटल जी की दूरगामी सोच।

अटल जी के निर्णयों में दूरगामी सोच स्पष्ट रूप में परिलक्षित होती थी। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से बनाया गया सड़को का नेटवर्क ग्रामीण भारत की वो धमनियां है जिनमें विकास का रक्त बह रहा है। अटल जी ने ही सर्वप्रथम कृषि सुधारो के बारे में सोचा एवं राष्ट्रीय किसान आयोग की स्थापना की। किसानो को क्रेडिट कार्ड प्रदान करने का उनका नवाचार वर्तमान में किसानो के लिए बहुत बड़ा सहारा है। 

नदियों को जोड़ने की उनकी दूरगामी सोच अब जमींन पर परिलक्षित होने लगी है। पोखरण में परमाणु बम परीक्षण के विस्फोट से उठी आग हमें वैश्विक स्तर पर एक अलग पहचान दिलाती है, उसी की बदौलत आज हम भी संपन्न राष्ट्र के रूप में वैश्विक शक्ति में शुमार है।

मोदी जी की कलम से।

अपने एक आलेख में मोदी जी ने अटल जी का पुण्य स्मरण करते हुए लिखा है- "हमारे देश में अनेक ऋषि, मुनि, संत, आत्माओ ने जन्म लिया है। देश की आजादी से लेकर आज तक की विकास यात्रा के लिए भी असंख्य लोगो ने अपना जीवन समर्पित किया है, लेकिन स्वतंत्रता के बाद लोकतंत्र की रक्षा और 21 वीं सदी के सशक्त, सुरक्षित भारत के लिए अटल जी ने जो किया वो अभूतपूर्व है।"

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